उत्तराखण्ड

अलकनंदा हाइड्रो प्रोजेक्ट्र की खाली पड़ी भूमि पर रखे टायर, पाइप और ड्रमों में मिला डेंगू का लार्वा

भारत सरकार की आरओएचएफडब्ल्यू और एनवीबीडीसीपी टीम ने डेंगू मच्छर पनपने को लेकर किया निरीक्षण

टीम के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने लगाया कंपनी पर 25 हजार का जुर्माना और जल्द सफाई करने के दिये निर्देश

श्रीनगर। प्रदेश में डेंगू के बढ़ते केसों को देखते हुए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रदेश के सबसे अधिक डेंगू वाले वाले क्षेत्रों में तीन सदस्यीय टीम भेजी है। जिसमें क्षेत्रीय कार्यालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण लखनऊ एवं भारत सरकार के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केन्द्र दिल्ली से पहुंचे जांच टीम ने श्रीनगर शहर के सहित श्रीनगर के अलकनंदा हाइड्रो प्रोजेक्ट के कार्यालय के समीप निरीक्षण किया। जिसमें टीम ने पॉवर प्रोजेक्ट की कोटेश्वर कॉलोनी में सबसे अधिक डेंगू मच्छर पनपने के सोर्स को पाया गया और बड़ी मात्रा में लार्वा होना पाया गया।

भारत सरकार की टीम के सदस्यों ने इस पर काफी नाराजगी जताते हुए कंपनी के अधिकारियों को फटकार लगायी और जल्द ही पूरे क्षेत्र साफ करने के साथ साथ सभी जगह से जमा स्टोर पानी को खाली करने के निर्देश दिये। जबकि टीम के निर्देश पर तहसील प्रशासन ने कंपनी पर 25 हजार का जुर्माना भी ठोका गया।

क्षेत्रीय कार्यालय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण लखनऊ भारत सरकार यूपी और उत्तराखंड के वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बीके चौधरी एवं राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केन्द्र दिल्ली (एनवीबीडीसीपी) के एन्टोमोलॉजिस्ट एन.ए जॉनसन अमला ज्वस्टिन और इंसेक्ट कलेक्टर जमुना लाल एवं मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के प्राचार्य डॉ. सीएमएस रावत व कम्यूनिटी मेडिसिन विभाग की श टीम के साथ कोटेश्वर कॉलोनी के खाली पड़ी भूमि पर कंपनी के पड़े पुराने टॉयर, ड्रम, पाइपों को देखा तो जगह जगह बरसात का जमा पानी था और जिसमें बड़ी मात्रा में डेंगू मच्छर का लार्वा व पयूपा पाये गये।

टीम के सदस्यों ने मौके पर लार्वा के सैंपल भी लिये गये। यहां सबसे अधिक डेंगू मच्छर पैदा होने के सोर्स पाये जाने और जागरूकता के बाद भी सफाई ना करने पर कड़ी नाराजगी जताई। टीम द्वारा निरीक्षण के बाद डेंगू की रिपोर्ट भारत सरकार को प्रेषित करेगे। वहीं टीम के सदस्यों ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर मच्छरों के लिये गये लार्वा के सैंपलों से मेडिकल कॉलेज के एम.डी. में अध्ययन रत छात्र-छात्राओं को भी अवगत कराया तथा मच्छर फैलने वाले कारकों एवं मच्छर न फैले इसके निराकरण के लिए कम्युनिटी में कैसे कार्य किया जाता है, इसके लिए विभिन्न टिप्स दिये। एन्टोमोलॉजिस्ट एन.ए जॉनसन अमला ज्वस्टिन ने मच्छरों पर किये गये शोध की डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई।

”उत्तराखंड में दो-तीन सालों के तुलना करे तो इस साल यहां अधिक केस मिलने पर भारत सरकार द्वारा जांच के लिए भेजा है, देहरादून में अधिक मात्रा में मच्छर पैदा करने वाले स्थान मिले। इसके बाद श्रीनगर के डैम कॉलोनी में पाया तो यहां सबसे अधिक डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों के पैदा करने वाले स्थान मिले। जो कि पूरे श्रीनगर को डेंगू व चिकनगुनिया की चपेट में ले सकता है। इसलिए कंपनी के जीएम को मौके पर जल्द साफ-सफाई व जगह-जगह स्टोर हुए पानी को खाली करने के निर्देश दिये गये। यहां पर डेंगू का एडिज और चिकनगुनिया के मच्छर ऐडीस इजिप्ती और एडीस एल्बोपिक्टस मच्छर का लार्वा के साथ साथ एनाफिलीज के लार्वा भी बड़ी मात्रा में पाये गये। जिस तरह से कंपनियों के स्टोरों एवं खाली पड़ी जमीन पर मच्छरों के पैदा करने के लिए स्थान तैयार किये गये, यदि बारिश होती है तो उत्तराखंड में पुनः डेंगू फैलने के पूरे पूरे चांस है। इसलिए सतर्कता व बचाव से समय रहते सभी को सामूहिक प्रयास से मच्छर का लार्वा पैदा ना हो इसके लिए गाइडलाइन के अनुसार कार्य करे।

  ———- डॉ. बीके चौधरी, वरिष्ठ क्षेत्रीय निदेशक  आरओएचएफडब्ल्यू  यूपी-उत्तराखंड

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