उत्तराखण्ड धार्मिक

लाठी-डांडो के युद्ध के साथ संम्पन्न हुआ नौठा कौथिग

चमोली :  जिले के आदिबदरी में आयोजित नौठा कौथीग सोमवार को ढोल-दमाऊं की थाप पर आयोजित प्रतिकात्मक लाठी व डांडो के युद्ध के साथ संम्पन्न हो गया है।  जिसके पश्चात ग्रामीणों ने भगवान नारायण को नौ-नाज (नया अनाज) अर्पित कर पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की समृद्धि और खुशहाली की मनौती मांगी।
मेले का समापन अधिनस्थ चयन आयोग के सदस्य डाॅ प्रकाश थपलियाल ने किया। इस मौके पर रूपकुंड लोककला मंच देवाल के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। वहीं दूसरी ओर से यहां परंपरा के अनुसार दोपहर एक बजे ढोल-दमाऊं के साथ खेती के मालगुजार दिनेश पंवार ग्रामीणों के साथ आदिबदरी मंदिर पहुंचे। जहां मंदिर समिति के अध्यक्ष विजयेश नवानी ने मालगुजार व खेती के ग्रामीणों का स्वागत किया। इस दौरान परंपरा के अनुसार विजयेश ने खेती के मालगुजार को सरज की काली टोपी व तलवार भेंट की। जिसके बाद यहां रंडोली के ग्रामीणों की टोली पहुंची और मंदिर प्रांगण में ढोल-दमांऊ की थाप के साथ लाठी-डंडों के प्रतीकात्मक युद्ध का आयोजन किया गया। जिसके बाद दोनों गांवों के ग्रामीणों ने भगवान नारायण को नौ-नाज अर्पित कर एक दूसरे को गले लगाकर मेले का समापन किया।

इस मौके पर मेला समिति के उपाध्यक्ष विनोद नेगी, महासचिव गैंणा रावत, कोषाध्यक्ष नरेश बरमोला, यशवंत भंडारी, बलवंत भंडारी, विजय चमोला, पंकज सती, नवीन बहुगुणा, नरेंद्र चाकर  नवीन खण्डूरी, हिमेंद्र कुंवर, नंदा पंवार, बलवंत नेगी व भूपेंद्र कुंवर आदि मौजूद थे।


आदिबदरी के नौठा कौथीग की पौराणिक मान्यता

आदिबदरी मंदिर के पुजार तरुन ने बताया कि यहां पौराणिक काल से प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह में ग्रामीणों की ओर से भगवान नारायण को नौ-नाज (नया अनाज) अर्पित कर क्षेत्र की समृद्धि की मनौती मांगने की परंपरा है। ऐेसे पूर्व काल में एक बार क्षेत्र के खेती और रंडोली गांव के मालगुजारों के बीच नौ-नाज पहले अर्पित करने को लेकर लट्ठों के साथ युद्ध हो गया। जिसमें खेती के ग्रामीणों ने जीत हासिल की। जिसके बाद यहां परंपरा निर्वहन के साथ यहां नौठा कौथिग के दौरान प्रतीकात्मक लट्ठो के युद्ध का आयोजन कर खेती और रंडोल के साथ ही अन्य गांवों के ग्रामीाण भगवान नारायण को नौ-नाज आर्पित करते हैं।


 

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